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Saturday, 22 July 2017

swabhlamban ki seekh

स्वाभलम्बन की सीख 

एक समय की बात है दो दोस्त होते है सोहन और मोहन, सोहन पैसे वाला होता है उसके पासरहने को एक अच्छा सा घर होता है  और बाकी सारी सुविधाएं होती है  वही दूसरी और मोहन बहुत ही गरीब रहने के लिए मात्र एक झोपडी और कुछ जीवन यापन करने के लिए सामान होता है लेकिन उनकी मित्रता बहुत ही घनिष्ठ थी सोहन मोहन को हमेशा अपने घर बुलाता रहता है  एक दिन मोहन सोहन के घर जाता है वहा काम करने वाले बहुत सारे नौकर रहते है कोई उसके लिए चाय लेके आता है कोई पानी कोई उसके लिए नाश्ता लेके जाता है ये सब देख के मोहन बहुत खुश होता है एक सोहन मोहन से कहता है मै भी तुम्हारे घर आना चाहता हु मोहन

Tuesday, 27 June 2017

boring life ko kese change kare

क्या आप की ज़िंदगी भी बोरिंग हो गयी है क्या आप के पास कोई काम भी नहीं है तो ये करे 

How to remove boraingness

ये एक छोटी सी कहानी है जिसको पढ़ के आप भी जान पाएंगे की बोरिँग्नेस को दूर कैसे करे 

अक्शर देखा गया है अगर कोई भी व्यक्ति सही उम्र में कोई काम नहीं चुन लेता है और जब समय उसके हाथ से निकल जाता है तो उसे कुछ अच्छा नहीं लगता मेरे मित्र की भी यही कहानी है अब वो 29 साल के हो गए है उनके पास करने को कुछ नहीं इस कारन ना तो उनका विवाह हो रहा है और ना ही जीवन में कोई बदलाव मानो ज़िंदगी रुक सी गयी है उनके पिता का पिछले साल देहांत हो चूका है और बड़े भाई एक कंपनी में काम करते है जिनसे उनका घर खर्च चलता है अब वो सुबह रोज 9 बजे उठते है सारे काम निपटा के खाना खा सो जाते है फिर शाम को एक बाजार का चककर लगा कर ऐसे लोगो में बैठ जाते है जो सिर्फ उलटी शिक्षा देते है।

Friday, 16 June 2017

Ek pita ki seekh

पिता की सीख 

पिता की सीख 
दो भाई थे एक का नाम था धर्मपाल और दूसरे का नाम था बाबूलाल धर्मपाल अपने नाम के अनुकूल एक दम सीधा और ईमानदार था वही बाबूलाल बहुत तेज दुसरो से रुपए एठने वाला आदमी था उनके पिता किसान थे धर्मपाल दूध बेच के अपना घर परिवार चलता था रोज सुबह सुबह वे हमारे यह दूध देने आया करते थे ,धर्मपाल के पिता बाबूलाल से बहुत परेशान रहते थे क्यों की वह हमेशा किसी ना किसी से पैसे उधार लेके बेठ जाता और जब चुकाने का टाइम आता तो पैसे देने में आना कानि करता और उसका खामियजा उनके पिताजी को भोगना पड़ता एक बार इसी  बात को लेकर उनके परिवार बहुत ही जयादा कलेश हो जाता है ,बाबूलाल के पिताजी उसको कई बार समझा चुके थे सबसे पैसे लेकर मजे करना अच्छी बात नहीं है जब तू रिक्शा चलता है

Thursday, 1 June 2017

kese hua mha bali bheem ka vivah

कैसे हुआ महाबलि भीम का विवाह

bheem ka vivah

यह बात उस समय की है जब महाराज धतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन एव मामा शकुनि ने पांडवो को मारने के लिए लाक्षाग्रह तैयार किया था लेकिन उनके इस सरयंत्र से वो बच निकलते है और भागते भागते एक जंगल में पहुंचते है और वहा रात बिताने का निर्णय लेते है ,माता कुंती  द्वारा  यह निर्णय लिया जाता है की भीम रात्रि को पहरा देगा और बाकी सब विश्राम करेंगे माता की आज्ञा का पालन करते हुए भीम पहरा दे रहे होता  है जहा सभी पांडव रुके हुए होते है वो एक मायावी जंगल होता है उस जंगल में राक्षस हिडिम्ब और उसकी बहन हिडिम्बा रहते है राक्षसो में एक ऐसी शक्ति होती है जिससे वह मनुस्यो को सूंघ कर उनका पता लगा सकते है हिडिम्ब को पांडवो का जंगल में उपस्तिथ होने का आभास हो जाता है चुकि वे दोनों नरभक्षी होते है

Monday, 29 May 2017

The brahmin or thug hindi story

ब्राह्मण बकरी और तीन ठग 
The brahmin



एक समय की बात है एक ब्राह्मण महोदय एक राजा के यहां अनुष्ठान करवा रहे थे ,अनुष्ठान पूरा होने के पश्चात राजा ने ब्राह्मण महोदय को एक बकरी भेंट कर दी , और ब्राह्मण महोदय खुश होकर अपने घर की और चल पड़ते है , रास्ते में चलते चलते उन्हें तीन ठग देख लेते है और ब्राह्मण महोदय से बकरी छिनने की योजना बनाते है , तीन ठग एक सुनसान रास्ते में बैठ जाते है और पंडित जी का इंतजार करने लगते है ,जब ब्राह्मण उस रास्ते से निकलता है तब एक ठग उसके पास आकर बोलता है हे ! ब्राह्मण महोदय इस कुत्ते को आप सर पर रखकर क्यों ले जा रहे हो तभी ब्राह्मण उसको बोलता है मुर्ख तुझे बकरी कुत्ता नजर आ रही है