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Friday, 16 June 2017

Ek pita ki seekh

पिता की सीख 

पिता की सीख 
दो भाई थे एक का नाम था धर्मपाल और दूसरे का नाम था बाबूलाल धर्मपाल अपने नाम के अनुकूल एक दम सीधा और ईमानदार था वही बाबूलाल बहुत तेज दुसरो से रुपए एठने वाला आदमी था उनके पिता किसान थे धर्मपाल दूध बेच के अपना घर परिवार चलता था रोज सुबह सुबह वे हमारे यह दूध देने आया करते थे ,धर्मपाल के पिता बाबूलाल से बहुत परेशान रहते थे क्यों की वह हमेशा किसी ना किसी से पैसे उधार लेके बेठ जाता और जब चुकाने का टाइम आता तो पैसे देने में आना कानि करता और उसका खामियजा उनके पिताजी को भोगना पड़ता एक बार इसी  बात को लेकर उनके परिवार बहुत ही जयादा कलेश हो जाता है ,बाबूलाल के पिताजी उसको कई बार समझा चुके थे सबसे पैसे लेकर मजे करना अच्छी बात नहीं है जब तू रिक्शा चलता है और उससे पैसे भी कमाता है तो दुसरो से पैसे उधार क्यों लेता है और अगर लेता है तो उन्हें चुकाने की हिम्मत भी रख्खा कर वो लोग मुझे बीच बाजार में बहुत परेशान करते है लेकिन बालूलाल को अपनी पिता की बातो से कोई प्रभाव नहीं पड़ा आखिर में जाते समय बाबूलाल के पिता जी ने एक ही बात कहि बेटा याद रखना ज़िंदगी में हमेशा परिवार वाले ही काम आते है ना कोई दोस्त आता है ना कोई रिस्तेदार आता है ,लेकिन बाबूलाल ने उनकी बातो को इस कान से सुना और दूसरे कान से निकाल दिया और ये कहते हुए अपने परिवार से अलग हो गया की मुझे किसी की कोई जरूरत नहीं है मै अपना घर परिवार बिना आप की किसी मदद के बगैर चला सकता हु ,कुछ दिनों तो सब कुछ ठीक चला एक दिन बाबूलाल की पत्नी अपने बच्चो के साथ अपने मायके गयी हुई थी ,और बाबूलाल की तबीयत अचानक इतनी ख़राब हो गयी की वो बिना किसी की मदद के उठ भी नहीं सकता था ,उसने अपने सारे दोस्तों को बहुत फोन किये लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ उसके साथ वैसा ही हुआ जैसा जब एक लड़का रोज रोज भेड़िया आया भेड़िया आया चिल्लाता था और लोग रोज उसके बात सुनकर उसके पास चले जाते और कुछ समय बाद उन्होंने उसकी बात को  सुनना बंद कर दिया आखिर बाबूलाल को अपने पिताजी को मदद के लिए बुलाना ही पड़ा वो उसे उसी समय डॉक्टर के पास ले गए और डॉक्टर ने कहा अच्छा हुआ आप इन्हे सही समय पर ले आये वर्ना इसका बचना नामुमकिन ही था , ये बात सुनकर बाबूलाल की आँखे खुल गयी और वो अपने पिताजी से बोला पिताजी आप जैसा बोलोगे में वैसा ही करुँगा ना तो मै किसी से पैसे उधार लुगा और ना ही किसी के साथ धोखा करुगा ये कहते हुए बाबूलाल अपने पिता से लिपटकर जोर जोर से रोने लगा और उसके पिता जी ने कहा अब कोई चिंता की बात नहीं है तुझे कल तक छुट्टी मिल जायेगी तू एक दम ठीक हो जाएगा , बाबूलाल के इस बदलाव को देखकर उसके पिता भी बहुत खुश हुए और अगले दिन से बाबूलाल के साथ रहने लगे धर्मपाल ने इस बड़े बदलाव को देखकर बाबूलाल के कई दिनों तक मजे लिए और सब ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे।

तो दोस्तों आप को हमारी कहानी कैसी लगी मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और अगर आप के पास भी कोई ऐसी कहानी या कोई ऐसा अनुभव है जो आप सब लोगो के साथ शेयर करना चाहते है तो मुझे sainmukesh7229@gmail.com पे जरूर सेंड करे मै आप के उस अनुभव को लोगो के साथ जरूर शेयर करुगा

साथ ही एक ऐसी बात जो मैने अपने पिताजी से सीखी है ज़िंदगी बड़ी कड़वी है इसे मुस्कुराके जिए छोटे छोटे अनुभवों से बड़ी बड़ी सीख जरूर ले।

Thursday, 1 June 2017

kese hua mha bali bheem ka vivah

कैसे हुआ महाबलि भीम का विवाह

bheem ka vivah

यह बात उस समय की है जब महाराज धतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन एव मामा शकुनि ने पांडवो को मारने के लिए लाक्षाग्रह तैयार किया था लेकिन उनके इस सरयंत्र से वो बच निकलते है और भागते भागते एक जंगल में पहुंचते है और वहा रात बिताने का निर्णय लेते है ,माता कुंती  द्वारा  यह निर्णय लिया जाता है की भीम रात्रि को पहरा देगा और बाकी सब विश्राम करेंगे माता की आज्ञा का पालन करते हुए भीम पहरा दे रहे होता  है जहा सभी पांडव रुके हुए होते है वो एक मायावी जंगल होता है उस जंगल में राक्षस हिडिम्ब और उसकी बहन हिडिम्बा रहते है राक्षसो में एक ऐसी शक्ति होती है जिससे वह मनुस्यो को सूंघ कर उनका पता लगा सकते है हिडिम्ब को पांडवो का जंगल में उपस्तिथ होने का आभास हो जाता है चुकि वे दोनों नरभक्षी होते है

Monday, 29 May 2017

The brahmin or thug hindi story

ब्राह्मण बकरी और तीन ठग 
The brahmin



एक समय की बात है एक ब्राह्मण महोदय एक राजा के यहां अनुष्ठान करवा रहे थे ,अनुष्ठान पूरा होने के पश्चात राजा ने ब्राह्मण महोदय को एक बकरी भेंट कर दी , और ब्राह्मण महोदय खुश होकर अपने घर की और चल पड़ते है , रास्ते में चलते चलते उन्हें तीन ठग देख लेते है और ब्राह्मण महोदय से बकरी छिनने की योजना बनाते है , तीन ठग एक सुनसान रास्ते में बैठ जाते है और पंडित जी का इंतजार करने लगते है ,जब ब्राह्मण उस रास्ते से निकलता है तब एक ठग उसके पास आकर बोलता है हे ! ब्राह्मण महोदय इस कुत्ते को आप सर पर रखकर क्यों ले जा रहे हो तभी ब्राह्मण उसको बोलता है मुर्ख तुझे बकरी कुत्ता नजर आ रही है

Monday, 22 May 2017

Tom cruise life story

टॉम क्रूज को भी थी डिस्लेक्सिया


tom cruise

दोस्तों आज हम ऐसी बीमारी के बारे में बताने जा रहे है,जिसमे व्यक्ति की समझने के शकती बहुत कम होती है। ये बीमारी आम तौर पर ३ से 15 साल की उम्र के बच्चो में पायी जाती है ,अगर आप लोगो ने तारे जमीन पर देखी है तो आप इसे भली भांति परिचित होंगे ,तो दोस्तों अब हम आप को टॉम क्रूज के बारे में इस बीमारी को हराकर उनके सक्सेस होने की कहानी बतायेगे। हॉलीवुड के मशहूर स्टार टॉम क्रूज को कौन नहीं जानता है ,पर बहुत कम लोग जानते है जब टॉम छोटे थे तब उन्होंने बहुत मुश्किल भरे दिन देखे टॉम एक गरीब परिवार में पैदा हुए था ,और उनकी पढाई के दौरान उन्हें एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा था। टॉम के पिता पेशे से एक इंजीनयर थे काम की तलाश में उन्हें अक्सर इधर उधर जाना पड़ता था,

Tuesday, 16 May 2017

Do bhaiyo ki kahani

एक समय की बात है दो भाई थे ,उनमे आपसी प्रेम बहुत ही अधिक था दोनों के दिन की शुरुआत एक दूसरे को देखे बिना नहीं होती थी. दोनों भाई सम्पन्न होने के कारन उनमे आपसी मतभेद बिलकुल न था ,एक दिन दोनों की किसी जमीनी विवाद को लेकर बहुत ज्यादा लड़ाई हो जाती है। आपसी बोल चाल बंद हो जाता है ,महीने बीतते है साल बीतते है ,और वर्षो बीत जाते है लेकिन एक दूसरे से बात करना तो दूर वो एक दूसरे का मुँह देखना भी पसंद नहीं करते है ,इस आपसी विवाद के कारन उनके परिवार दो समूहों में बट जाते है और उनके बेटे उनकी पत्निया कोई भी आपस में नहीं बोलता है ,एक बार जब दोनों के परिवार एक सत्संग में जाते है और वहां बैठकर सत्संग सुन रहे होते है तभी अचनाक बारिश आ जाती है , और वह बैठे सभी उप्स्तीथ लोग एक किनारे आकर खड़े हो जाते है ,छोटा भाई भी जहा चंपप्ले पड़ी होती है वही खड़ा हो जाता है ,अचनाक