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Wednesday, 10 January 2018

Janiye january me janam lene wale logo ki 7 khas baate

जानिए जनवरी में जनम लेने वाले लोगो की 7 खास बाते  
january


दोस्तों  हम बात करेंगे जनवरी में जन्मे लोगो का सवभाव कैसा होता है अगर आप मे से किसी का जनम जनवरी में हुआ तो ये पोस्ट आपके लिए ही है दोस्तों जनवरी में जन्मे लोगो का सवभाव बड़ा ही शांत होता है जनवरी में जन्मे लोगो की राशि सामान्य तोर पे कुंभ और मकर होती है कुंभ राशि के जातको का सवभाव शांत होता है।

जनवरी में पैदा हुए लोगो का भाग्य बहुत अच्छा  होता है ये किसी को जानबुझकर चोट नहीं पहुंचाते है इनका दिल एक दम साफ़ होता है अगर ये किसी को कुछ कहते है तो उसके पीछे कारन जरूर होता है, बिना कारन ये किसी का दिल नहीं दुखाते है।

Thursday, 28 December 2017

Life story of radhe maa

एक आम लड़की से राधे माँ बनने का सफर
राधे माँ 
दोस्तों आज हम बात करेंगे राधे माँ की दोस्तों यू तो अब बहुत सारे धार्मिक गुरुओ को आप जानते हो जिनमे सबसे बड़े है आसाराम और बाबा रामरहीम लेकिन इन्ही के बीच एक और गुरु है जिनका नाम है राधे माँ राधे माँ का पूरा नाम सुखविंदर कौर है इनका  का जनम पंजाब के गुरुदासपुर जिले के दोरंगाला गांव में हुआ था राधे माँ के अनुनायियों के अनुसार वे एक बच्चे के रूप में आध्यत्मिकता के लिए तैयार थी और वह अपने गांव के काली मंदिर में बहुत समय बिताती थी राधे माँ ने 4th क्लास तक पढाई की है इनकी शादी 17 वर्ष की आयु में मोहन सिंह के नाम से की गयी थी मोहन सिंह की आय बहुत काम थी इसलिए सुखविंदर

Tuesday, 19 December 2017

Jhasi ki rani laxmi bai in hindi

झांसी की रानी 

झांसी की रानी की जीवन गाथा  {life story of rani laxmibai}

दोस्तों आज हम जानेगे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में  लक्ष्मीबाई का पूरा नाम रानी लक्ष्मीबाई गंगाधरराव था। 
उनका जनम 19 नवंबर 1835 में हुआ था उनका जनम स्थान वाराणसी था उनके पिता का नाम मोरोपंत था तथा उसकी माता का नाम भागीरथी था उनका विवाह राजा गंगाधर राव के साथ हुआ। झांसी की रानी के ऊपर एक किताब लिखी गयी जिसका नाम था लक्ष्मीबाई  जनम का  वाराणसी के नामक नगर में हुआ उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था परन्तु प्यार से उन्हें मनु कहा जाता था मनु की माँ भागीरथी और मोरोपंत जब मनु 4 वर्ष की थी महाराष्ट्र से झांसी आये थे मनु की माँ का निधन जब मनु चार वर्ष की थी तभी हो गया था मोरोपंत मराठा बाजीराव की सेवा में थे मनु की माँ के निधन के बाद उसकी देखभाल करने वाले सिर्फ उसके पिता ही थे इसलिए मनु को उसके पिता पेशवा बाजीराव के दरबार में ले गए मनु की प्राथमिक शिक्षा वही से शुरू हो गयी थी मनु ने बचपन में ही शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण कर ली थी मई 1842 में 8 वर्ष की आयु में मनु का विवाह महाराजा गंगाधरराव नावेलकर के साथ हुआ और वह उसके बाद झांसी की रानी बनी विवाह के बाद उनका नाम रानी लक्ष्मीबाई रखा गया। 



झांसी की रानी लक्ष्मीबाई 

1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जनम दिया जिसका नाम दामोदर रखा गया लेकिन मात्र 4 वर्ष की आयु में हु उस बालक की मृत्यु हो गयी इसके बाद महाराजा में एक पुत्र गोद लिया जिसका नाम भी दामोदर राव रखा ,दामोदर राव महाराजा गंगाधर राव के भाई का पुत्र था।  लेकीन ब्रिटिश राज को यह मंजूर नही था इसलिए उन्होंने दामोदर के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। उस मुक़दमे में दोनों ही तरफ से बहोत बहस हुई लेकिन बाद में इसे ख़ारिज कर दिया गया।
घुड़सवारी करने में रानी लक्ष्मीबाई बचपन से ही निपुण थी। उनके पास बहोत से जाबाज़ घोड़े भी थे जिनमे उनके पसंदीदा सारंगी, पवन और बादल भी शामिल है। जिसमे परम्पराओ और इतिहास के अनुसार 1858 के समय किले से भागते समय बादल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में रानी महल, जिसमे रानी लक्ष्मीबाई रहती थी वह एक म्यूजियम में बदल गया था। जिसमे 9 से 12 वी शताब्दी की पुरानी पुरातात्विक चीजो का समावेश किया गया है।
उनकी जीवनी के अनुसार ऐसा दावा किया गया था की दामोदर राव उनकी सेना में ही एक था। और उसीने ग्वालियर का युद्ध लड़ा था। ग्वालियर के युद्ध में वह अपने सभी सैनिको के साथ वीरता से लड़ा था। जिसमे तात्या टोपे  और रानी की संयुक्त सेनाओ ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिको की मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्ज़ा कर लिया।
17 जुन 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रिटिश सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त की।
झांसी की रानी के ऊपर एक किताब लिखी गयी जिसका नाम था द रानी ऑफ़ झांसी रेबेल अगेंस्ट विल इस किताब के अनुसार लेंग को यह कहते हुए बताया गया की रानी का कद समानय था वह तगड़ी थी युवा अवस्था में उनका चेहरा बहुत सुन्दर रहा होगा उनका चेहरा जरुरत से जयादा गोल था उनकी आवाज अच्छी नहीं थी फटी हुई थी उन्होंने कानो में सोने की बलिया पहन राखी थी उसके आलावा उन्होंने एक भी जेवर धारण नहीं कर रखा था उनकी आखे बहुत सुन्दर थी उन्होंने सफ़ेद रंग की साडी पहन राखी थी जिनमे से उनके शरीर का रेखांकन साफ़ दिखाई दे रहा था। 
रानी लक्ष्मीबाई एक निडर और बहुत ही महान रानी साबित हुई जब तक उन्होंने अपने राज्य में कार्यभार संभाला उन्होंने सब का मन मोह लिया उन्होंने प्रजा के हिट में बहुत सारे काम किये इसी कारन प्रजा भी उनका सम्मान बड़े अपने पन से करती थी मैं रानी की नमन करते हुए उनकी एक छोटी सी चार लाइन आपके लिए प्रस्तुत करता हु। 

source:gyanipandit.com

Thursday, 14 December 2017

ROMAN RINGS LIFE STORY

Roman rings
दोस्तों आज हम जानेगे रोमन रिंग्स के बारे में रोमन रिंग्स का पूरा नाम लिटी जोसेफ "जो" अनोआ इ एक अमरीकी पेशेवर पहलवान और सेवानिवर्त कनाडिआई फुटबॉलर है वे तीन बार वर्ड हैविवेट चैम्पियन बन चुके है डब्लूडब्लूई यूनाइटेड स्टेट चैंपियन बन चुके है ,रोमन रिंग्स का जन्म पेन्सकोला फ्लोरिडा में 25 मई 1985 को हुआ इनमे 120 किलो वजन है इनकी hight '6.'3 '  फ़ीट है रोमन रिंग्स के पिता का नाम  सिका है और इनके  भाई पेशेवर पहलवान है समोअन परिवार का सदस्य होने के नाते योकोजुना उसोस उमागा और द रॉक के चचेरे भाई है इतिहास के अनुसार ये भील है जो की भारत में भी है इन्हे आदिवासी कहा जाता है रोमन रिंग्स ने 2014 में अपने स्कूल टाइम की मित्र को अपना जीवन साथी बनाया जिनका नाम गेलिना बेकर है इनके एक बेटी भी है जिनके साथ इनकी फोटोज अक्शर सोशल मीडिया में आती रहती है रोमन रिंग्स ने जार्जिया इंसीट्यट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से प्रबंद की पढाई की है।
Roman rings

भोपाल में गैंगरेप वर्दीवालों की बेरुखी का शिकार हुई पुलिस की बेटी


रोमन रिंग्स का फुटबॉल सफर 

रोमन रिंग्स ने अपने स्कूल टाइम में ही फूटबाल खेलना शुरू कर दिया था वे तीन वर्ष पेसाकोला केथिलिक हाई स्कूल और 1 वर्ष एसकेम्बिया स्कूल में खेले इस दौरान उन्हें पेसकोला न्यूज़ जरनल द्वारा वर्ष का सुरक्षात्मक खिलाड़ी घोषित किया गया।



Let's more about Akshay Kumar





Monday, 20 November 2017

Murkho ne wapas maagi chapti naak

                                                        मूर्खो ने वापस मांगी चपटी नाक
दोस्तों आज की हमारी कहानी बहुत ही मजेदार है आशा करता हु आपको जरूर पसंद आएगी तो चलिये शुरू करते है एक समय की बात है एक गरीब व्यक्ति कठोर तपस्या करके देवताओ से वर प्राप्त करता है वरदान यह था की देवता ने एक पासा दिया जिसे किन्ही तीन कामनाओ की पूर्ति हेतु तीन बार उछलना था जिससे मनचाहा कार्य हो सकता था वह वयक्ति आन्दोलित हो घर आकर अपनी पत्नी के साथ विचार विमर्श करने लगा की वर क्या मांगना चाइये ,स्त्री ने कहा धन दौलत मांगो लेकिन पति ने कहा देखो हम दोनों की नाक चपटी है और उसके कारन लोग हमारी हसी उड़ाते है अतः पहली बार पासा फेक कर सुन्दर नाक की डिमांड करनी चाइये किन्तु पत्नी की इच्छा नहीं थी उसे तो धन दौलत चाइये था दोनों में खूब वाद विवाद हुआ अतः पति ने क्रोध में आकर यह कहते हुए पासा उछाल दिया की हमे सुन्दर नाक चाइये सुन्दर नाक चाइये सुन्दर नाक चाइये आस्चर्य जैसे ही उसने कहा वैसे ही उसके नाक पे तीन नाक उत्पन्न हो गयी तब उसने देखा ये यो घोर संकट उत्पन्न हो गया क्युकी तीन तीन नाक से चेहरा और भी कुरूप हो गया तब आनन् फानन में दूसरी बार पासा उछालते हुए कहा की सभी नाक चली जाए तत्षण सभी नाके चली गयी साथ ही खुद की चपटी नाक भी चली गयी अब तो और भी गहरा संकट खड़ा हो गया बिना नाक का चेहरा हसी का विषय बनेगा अब बचा आखरी वरदान तो उन दोनों ने सोचा की अब अगर हम सुन्दर नाक मांगेगे तो लोग सुन्दर नाक देखकर जरूर हमसे पूछताछ करेंगे और हमे सभी बाते उनको बतानी पड़ेगी और तब वे हमे मुर्ख समझकर हमारी हसी उड़ायेंगे कहेगे की लोग तीन वरदान प्राप्त करके भी ये लोग अपनी माली हालत को सुधार नहीं पाए महामूर्ख है ये ऐसा विचार आते ही दोनों ने वापस अपनी चपटी नाक वापस मांग ली। सुच कहा है किसी ने  बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताए मुर्ख काम बिगाड़े अपना जगमे होत हसाये ,क्या उपरोक्त दस्त्रांत हम सभी मनुस्यो पर लागू होता है या नहीं यह से चिंतनीय विषय है।